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बद्रीविशाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, बर्फीली वादियों के बीच तप्त कुंड की गर्माहट ने किया हैरान; इस वर्ष 9 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके धाम, जानिए पूरी जानकारी

बद्रीविशाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, तप्त कुंड की अद्भुत गर्माहट ने किया आश्चर्यचकित, जाने पूरी जानकारी

बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड।

हिमालय की बर्फीली चोटियों के मध्य समुद्र तल से लगभग 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भगवान बद्रीविशाल का पावन धाम इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंचकर भगवान विष्णु के दर्शन कर रहे हैं। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी विशेषताओं के कारण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

चारधाम यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। बद्रीनाथ धाम में दर्शन करने वालों का आंकड़ा लाखों में पहुंच चुका है और अब तक 9 लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। वहीं चारों धामों में कुल मिलाकर 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध कर रहा है, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उत्तर प्रदेश से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु संदीप सिंह, राज और छोटू तथा गाजीपुर से पहुंचे अभिषेक ने बताया कि बद्रीविशाल के दर्शन उनके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि लंबी यात्रा और पहाड़ी रास्तों की कठिनाइयों के बावजूद मंदिर में भगवान बद्रीनारायण के दर्शन करते ही सारी थकान दूर हो गई। मंदिर परिसर में गूंजते “जय बद्रीविशाल” के जयघोष और भक्तिमय वातावरण ने मन को गहरे तक प्रभावित किया।

श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से मंदिर के निकट स्थित तप्त कुंड को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया। उनका कहना था कि चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़ और अत्यंत ठंडा मौसम होने के बावजूद कुंड का जल गर्म रहता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। श्रद्धालुओं के अनुसार उन्होंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा, जहां प्राकृतिक रूप से गर्म जल का स्रोत इतनी ऊंचाई और ठंडे क्षेत्र में मौजूद है। परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन से पहले तप्त कुंड में स्नान कर स्वयं को शुद्ध करते हैं।

बद्रीनाथ धाम पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली और जोशीमठ होते हुए पर्वतीय मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है। जोशीमठ से बद्रीनाथ की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। यात्रा मार्ग में अनेक प्राकृतिक दृश्य, पर्वत श्रृंखलाएं और धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं को रोमांचित करते हैं।

मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। दर्शन के लिए कतार प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था तथा यातायात नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर यात्रा करने, गर्म कपड़े साथ रखने तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि बद्रीनाथ धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यहां पहुंचकर मन को जो शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है, उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। भगवान बद्रीविशाल के दर्शन और तप्त कुंड का अनुभव जीवनभर स्मरणीय रहने वाला है।

रिपोर्ट – विवेक श्रीवास्तव (क्रांतिकारी) सम्पादक

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