शिवपुर, बहराइच। विकासखंड शिवपुर की ग्राम पंचायत कोटवा, बहोरीकापुर और खैरा कला में सरकारी योजनाओं के तहत कराए गए विकास कार्यों की हकीकत चौंकाने वाली मिली। मौके पर पड़ताल के दौरान पंचायत भवनों पर ताले लटके मिले, कूड़ा पृथक्करण केंद्र बंद अनुपयोग वाला मिला, हैंडपंप खराब पाए गए और सामुदायिक शौचालयों की हालत बेहद दयनीय दिखाई दी। कई स्थानों पर गंदगी का अंबार और रखरखाव का अभाव साफ नजर आया।
ग्राम पंचायत बहोरीकापुर और कोटवा में पंचायत भवन बंद मिला। मौके पर ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत सहायक और अन्य जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं थे। इसी तरह खैरा कला पंचायत भवन पर भी ताला लटका मिला। छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए भी उन्हें ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि शासन का उद्देश्य पंचायत स्तर पर ही सेवाएं उपलब्ध कराना है।
ग्राम पंचायत कोटवा में बना कूड़ा पृथक्करण केंद्र पूरी तरह बंद मिला। बोर्ड टूटा हुआ था और परिसर लंबे समय से अनुपयोगी दिखाई दिया। वहीं ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के नाम वाले पुराने बोर्ड अब भी लगे मिले, जिससे रखरखाव की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बहोरीकापुर और खैरा कला में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब मिले। तेज गर्मी में ग्रामीणों राहगीरो को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ना आम बात है। रिकॉर्ड में मरम्मत और रखरखाव पर खर्च दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है।
ग्राम पंचायत कोटवा, बहोरीकापुर और खैरा कला की नालियां गंदगी से पटी मिलीं। कई जगह नालियां पूरी तरह चोक थीं, जिससे गंदा पानी सड़कों और गलियों में जमा हो रहा है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
बहोरीकापुर के सामुदायिक शौचालय में गंदगी फैली मिली। विद्युत बोर्ड, वॉश बेसिन और मूत्रालय टूटे हुए पाए गए। वहीं खैरा कला के सामुदायिक शौचालय में टाइल्स टूटी हुई थीं, वॉश बेसिन नहीं लगा था, सेप्टिक टैंक बदहाल था और खुले ढक्कन व पाइप खुले हुए गंदगी और बीमारी बदबू को न्योता दे रहे थे।
बहोरीकापुर के आंगनबाड़ी केंद्र में लगा नल काफी देर चलाने के बाद पानी देता मिला। ग्राम पंचायत बहोरीकापुर में एक स्थान पर दिखा कि कार्ययोजना बोर्ड पूरी तरह खाली लगा है, जिस पर किसी भी विकास कार्य का विवरण अंकित नहीं था। वहीं खैरा कला की पानी की टंकी के परिसर में झाड़-झंखाड़ उगे मिले, जिससे नियमित साफ-सफाई और रखरखाव पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इन तीनों ग्राम पंचायतों की तस्वीरें सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाती हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।
रिपोर्ट : विवेक श्रीवास्तव (क्रांतिकारी)
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