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बहराइच: नानपारा में अल्ट्रासाउंड सेंटर की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल, अभिलेख एवं मानकों की जांच की मांग

नानपारा/बहराइच। कस्बे के राकेश टॉकीज के निकट संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के दौरान कुछ बिंदु सामने आए हैं। पड़ताल में आवश्यक अभिलेखों, स्टाफ की तैनाती, पैथोलॉजी संचालन एवं अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारी मौके पर उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके चलते संबंधित विभाग से जांच की मांग की जा रही है।

पड़ताल के दौरान सेंटर पर मौजूद कर्मी से अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण, फायर सेफ्टी, बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन, स्टाफ की योग्यता एवं अन्य आवश्यक अभिलेख दिखाने का अनुरोध किया गया, लेकिन मौके पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इस संबंध में भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

निरीक्षण के दौरान सेंटर के बाहर लगे बोर्ड पर केवल अल्ट्रासाउंड सेंटर का उल्लेख दिखाई दिया, जबकि पैथोलॉजी का कोई अलग बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला। हालांकि परिसर में पैथोलॉजी से संबंधित कार्य होने की जानकारी मिली। पैथोलॉजी संचालन से संबंधित आवश्यक अनुमति एवं पंजीकरण की स्थिति का सत्यापन संबंधित विभाग द्वारा अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मौके पर एक महिला कर्मचारी तकनीकी कार्य करती बताई गई। वहीं उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभिलेखों में तकनीकी कर्मचारी के रूप में अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज होने की बात सामने आई। इस संबंध में वास्तविक स्थिति भी विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की जानकारी मिली, लेकिन फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं अग्नि सुरक्षा के लिए दिखाए गए फायर एक्सटिंग्विशर पर वर्ष 2022 अंकित मिला। उसकी वर्तमान वैधता एवं निर्धारित अवधि में सर्विसिंग हुई है या नहीं, इसका सत्यापन भी संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।

नियमों के अनुसार अल्ट्रासाउंड केंद्रों का संचालन पीसी-पीएनडीटी अधिनियम, 1994 एवं उससे संबंधित नियमों के अनुरूप किया जाना आवश्यक है। वहीं पैथोलॉजी सेवाओं के संचालन, योग्य तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता, बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण तथा अग्नि सुरक्षा संबंधी निर्धारित मानकों का पालन भी अनिवार्य है।

स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि सेंटर के पंजीकरण, स्टाफ की पात्रता, पैथोलॉजी संचालन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और जांच में यदि किसी प्रकार की कमी पाई जाए तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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