रिपोर्ट- विवेक कुमार श्रीवास्तव कार्यालय
सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई मध्यान्ह भोजन योजना (मिड डे मील) हर सरकारी योजना की तरह बस कागजों पर ही बेहतर संचालित हो रही है।
मिड डे मील के निर्धारित मीनू के अनुसार तो शायद ही किसी स्कूल में भोजन दिया जाता हो।
ताजा मामला बहराइच जिले के बलहा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुरवा सेकेंड का है, जहां छात्रों को मध्याह्न भोजन व्यस्थित व मीनू अनुसार नहीं दिया जा रहा।
प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुरवा सेकंड में मिड डे मील योजना में देखा गया कि लगभग 90 से 100 बच्चे उपस्थित होने के बाद भी मात्र डेढ़ किलो दाल चने में व चावल सभी बच्चों को मध्यान भोजन कराए जाने की बात सामने आई जब इस बारे में गहराई से परखा गया तो पता चला कि शायद ही कभी मीनू के नियम अनुसार मिड डे मील बनता हो और फल दूध का वितरण होता हो। विद्यालय के शौचालय एवं मूत्रालय गंदा है एवं पानी की टोटियां जो पानी पीने के लिए थी वह सब टूटी हुई है पानी पीने के स्थान के पास ही गंदगी है शौचालय मूत्रालय की व्यवस्था सही न होने की वजह से शौचालय के बाहर पेयजल टोटियों के पास ही शौच एवं मूत्र पड़े दिखे विद्यालय के निकट बने सामुदायिक शौचालय के अगल-बगल की इंटरलॉकिंग जर्जर धसी स्थिति में दिखी एवं पंचायत भवन के बाउंड्री निर्माण मैं घटिया ईंट का प्रयोग किया जा रहा है। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी बलहा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके नंबर पर संपर्क नहीं हो सका।
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