रिपोर्ट – विवेक श्रीवास्तव
बहराइच। विकास खंड शिवपुर की ग्राम पंचायत नेवादा पूरे कस्बाती का पंचायत भवन 21 जनवरी को ताला बंद मिला। यह वही पंचायत भवन है, जिसे ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, बैठकों, प्रमाण-पत्रों और जनसुनवाई का केंद्र माना जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आई।

पंचायत भवन, जो ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ और शासन की सबसे निचली इकाई का कार्यालय होता है, वहां ताला लटकना प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही के अभाव को दर्शाता है। पंचायत भवन बंद रहने से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास, आय, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना समेत अन्य जनहित कार्य प्रभावित होना तय हैं।
स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। पंचायत भवन में लगा समरसेवेल का पाइप टूटा हुआ है और परिसर में आज तक एक अदद नल तक नहीं लगाया गया है। जहां आम जनता को बैठकर अपनी समस्या बतानी चाहिए, वहीं पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है। यह हाल तब है जब हर पंचायत भवन के लिए रख-रखाव और सुविधाओं के नाम पर सरकारी धन खर्च होने का दावा किया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि पंचायत भवन केवल कागजों में संचालित है, जबकि वास्तविकता में यह अक्सर बंद ही रहता है। इससे पंचायत की उपयोगिता और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लग गया हैं।
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