रिपोर्ट – विवेक श्रीवास्तव बहराइच
बहराइच में मानवता को झकझोर देने वाले बलि कांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 वर्षीय मासूम विवेक वर्मा की निर्मम हत्या के दोषी चचेरे भाई अनूप कुमार वर्मा को फांसी की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया है, जबकि साक्ष्यों के अभाव में तांत्रिक समेत दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोषी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। यह जघन्य घटना नानपारा कोतवाली क्षेत्र के आगैया गांव की है, जहां 23 मार्च 2023 को खेत में मासूम का क्षत-विक्षत शव मिला था जिसपर पुलिस ने मुकदमा नंबर 153/2023 दर्ज किया। पुलिस की सतर्कता और जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने अंधविश्वास में अपने बीमार बेटे को ठीक करने के लिए अपने ही चचेरे भाई की बलि दे दी। इस पूरे मामले में कोतवाली नानपारा पुलिस की कार्यशैली सराहनीय रही, जहां तत्काल मुकदमा दर्ज कर गहन विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और सशक्त चार्जशीट के जरिए पुलिस ने अपराध की परतें खोलीं और मुख्य आरोपी को कानून के कठघरे तक पहुंचाया। विशेष रूप से नानपारा कोतवाल की सतर्कता, नेतृत्व क्षमता और निष्पक्ष कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि यदि पुलिस ठान ले तो अपराधी कितना भी सतर्क क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता। इस फैसले ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है, बल्कि समाज को यह कड़ा संदेश भी दिया है कि अंधविश्वास और अमानवीय कृत्यों के लिए कानून में कोई स्थान नहीं है।
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