बाराबंकी। बदली जीवन शैली में गाल ब्लैडर पित्त की थैली की पथरी में स्टोन का बनना आम समस्या है। पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में अधिक होती है ।अध्ययनों के मुताबिक इसके बनने की वजह पाचक रस का ज्यादा समय तक गालब्लेडर में रुके रहना, समय पर भोजन न करना ,कोलेस्ट्रोल का न घुल पाना है ।उक्त बातें हिंद इंस्टीट्यूट आफ साइंस सफेदाबाद बाराबंकी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर सी एस तिवारी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों से कहा ,।उन्होंने कहा कि इसकी वजह से गाल ब्लैडर का सिकुड़ना बंद हो जाना और धीरे-धीरे पाचक रस स्टोन के रूप में विकसित हो जाता है। आगे डा 0 तिवारी ने बताया कि कुछ मामलों में संक्रमण के कारण पाचक रस गाढ़ा होकर स्टोन बन जाता है ।यह बीमारी 40 साल की उम्र के बाद होती है ।महिलाओं में इसके अधिक होने का कारण हार्मोन परिवर्तन है।
*उपचार*
गाल ब्लैडर के स्टोन का उपचार सिर्फ सर्जरी द्वारा ही होता है, बीते कुछ दशकों में दूरबीन लेप्रोस्कोपिक विधि से सर्जरी बहुत ही कारगर सफल व सुरक्षित हो रही है ।इसे आधुनिक उपकरणों का से अंजाम दिया जाता है ।
*लक्षण*
पेट के दाएं और ऊपरी हिस्से में असहनीय दर्द होना, उल्टियां आना, गैस बनना, एसिडिटी होना, भूख कम लगना आदि लक्षण पाए जाते हैं।