भगवान श्रीराम दुष्टों का सर्वनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए : आचार्य मोहित शुक्ल।
सीएमडी न्यूज रिपोर्ट।। आशीष सिंह
बनीकोडर, बाराबंकी।। ग्राम शुक्लनपुरवा मजरे हथौंधा के छठवें दिवस की कथा जौनपुर से पधारे श्रद्धेय अनिल पांण्डेय (मानस वत्सल) ने धनुष यज्ञ की कथा प्रस्तुत कि उन्होने कहा कि भगवान शिव के धनुष की रस्सी चढ़ाने के लिए राम के धनुष छूते ही धनुष टूट गया, इससे पूर्व सीता की सखियों ने उनसे कहा कि आप ने मन में क्या सोचा है जिस धनुष को दश हजार बलशाली राजा मिलकर हिला तक नहीं सके उसकी प्रत्यंचा सुकोमल राम कैसे चढा पाएंगे सीता ने कहा कि धनुष सती का मन है और दश हजार उनका वचन है जैसे सती साध्वी का मनका कामी के हजारों याचना से डिगने वाला नहीं, जानकी ने कहा कि उनके मन ने सांवले सुकोमल का मन से वरण कर लिया!
आगे कि कथा आचार्य मोहित शुक्ल ने कही उन्होने कहा
कि भगवान श्री राम दुष्टों का अंत करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए उन्होंने वनवास के बहाने दुष्टों एवं आताताई जिससे पृथ्वी वासी परेशान थे उनका अंत किया तथा धरती पर शांति एवं सौहार्द का राज स्थापित किया उन्होंने श्री राम के वन गमन की चर्चा करते हुए कहा कि श्री राम ने अपनी इच्छा से वन जाने की पृष्ठभूमि तय की थी एक दिन कैकेई अपने महल में बैठी थी पीछे से आकर राम ने उनकी आंखें बंद कर दी चारों भाई कोमलांग है इसलिए कैकई पहचान नहीं सकी परेशान होकर कहा कि कौन हो बताओ तो अब राम ने अपना नाम लेकर उन्हें अपने बारे में जानकारी दी उसी समय राम ने कैकेई से कहा था कि मां मुझे बड़े होकर बडे-बडे काम करने हैं,
करूंगा कैसे!
मां कुछ ऐसा करो कि मैं वन में चला जाऊं और दुष्टों का अंत कर सकूं, उन्होंने विभिन्न घटनाओं का भी जिक्र किया!
इस अवसर पर यज्ञ के आचार्य दिनेश मिश्र, यज्ञ के यज्ञमान आनन्द शुक्ला, मंच संचालक दिनेश शुक्ला, आचार्य मोहित शास्त्री, उत्तम कृष्ण शास्त्री, सुधाकर, गंगाबक्स सिंह, मधुकर तिवारी, कमलेश वर्मा, गंगाबक्स सिंह, सुशील मिश्र,भैरव तिवारी, आदि लोग उपस्थित रहे।
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