– जिले की हजाराें युवा खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा स्त्रोत।
– सीमित संसाधनों में हासिल की सफलता, भारतीय टीम में चयन अंतिम लक्ष्य।
कहते हैं कि अगर इरादों में मजबूती हो और सपनों को सच करने का जुनून, तो गरीबी और सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं बनते। इस कहावत को सच कर दिखाया है नानपारा तहसील के ग्राम भग्गापुरवा गांव निवासी नूपुर पांडेय ने। नूपुर का चयन उत्तर प्रदेश अंडर-15 महिला क्रिकेट टीम के लिए हुआ है, जो उनके भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल होने के सपने की ओर पहला व मजबूत कदम है।पिछले वर्ष भी नूपुर का चयन 21 सदस्यीय दल में हुआ था ।
लड़कों के साथ खेलकर सीखी क्रिकेट की बारीकियां
2011 में जन्मी नूपुर की क्रिकेट के प्रति दीवानगी तब शुरू हुई, जब वह अपने घर के सामने सआदत इंटर कालेज के मैदान में लड़कों को मैच खेलते देखती थी। नूपर भी उन लड़कों के साथ खेलने लगी और देखते ही देखते उनकी बॉलिंग में निखार आ गया। नूपूर की गेंदों से बल्लेबाजों की गिल्लियां उड़ने लगी। वहीं, उनकी फील्डिंग और बल्लेबाजी भी निखर गई। नूपूर को खेलता देख जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव इशरत महमूद खान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उनके सहयोग से ही नूपुर लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में पेशेवर प्रशिक्षण के लिए पहुंच सकी।
लखनऊ में कड़ा संघर्ष और अनुशासन
एक छोटे से गांव से निकलकर लखनऊ जैसे बड़े शहर में खुद को स्थापित करना आसान नहीं था। नूपुर के पिता नीरज पांडे एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और मां रुचि पांडेय शिक्षामित्र हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने नूपुर को पीछे नहीं हटने दिया। नूपुर लखनऊ में खुद अपना खाना बनाती हैं और दिन में दो बार कड़े अभ्यास के लिए स्टेडियम जाती हैं। उनके कोच आसिफ रजा का कहना है कि नूपुर की लगन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
प्रेरणा बनी नूपुर की सफलता
यूपी अंडर-15 टीम में चयन की खबर मिलते ही क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सचिव इशरत महमूद खान ने बताया कि नूपुर की यह उपलब्धि उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे गांवों से बड़े सपने देखती हैं। जिले के लिए गौरव का क्षण है।नूपुर का अंतिम लक्ष्य भारतीय महिला टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना और विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करना है। उनकी मेहनत और मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द ही राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाएंगी।
नूपुर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने जिले के सचिव इशरत महमूद खान और कोच आसिफ रजा को दिया है उन्होंने बताया कि उनकी कामयाबी में सबसे बड़ा सहयोग इन दोनों का रहा है ।
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