रिपोर्ट – अवनीश कुमार मिश्रा
बस्ती में मेडिकल कॉलेज सम्बद्ध ओपेक कैली अस्पताल में स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा दी गई है। यहां अस्पताल में ब्लेड बैंक, गायनी वार्ड से लेकर इमेरजेंसी के शौचालय तक गंदगी ही गंदगी, व टूटी शौचालय की शीट व टोटियां से टपकता पानी से फैल रहा गंदगी ही गंदगी।
प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की बस्ती मेडिकल कॉलेज सम्बद्ध ओपेक कैली अस्पताल में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां बीमारियों को गंदगी के जरिए दावत दी जा रही है। इस कारण यहां सरकार द्वारा चलाये जा रहे संचारी रोगों के खिलाफ अभियान फेल होता नजर आ रहा है। सरकार द्वारा लोगों को मच्छर जनित संचारी रोगों के बारे जागरूक करने और साफ सफाई के साथ दवाओं के छिड़काव के लिए संचारी रोगों के खिलाफ अभियान भी समय समय पर चलाया जाता है।
इसके लिए बकायदा प्रचार प्रसार करने और दवाओं के छिड़काव पर सरकारी धन भी खर्च किया जा रहा है। लेकिन लगता है इस अभियान से मेडिकल कालेज प्रशासन पूरी तरह से अनजान है। लगता है मेडिकल कॉलेज को जागरूक करने के लिए अलग से अभियान की जरूरत है। मेडिकल कालेज की इमरजेंसी व गायनी वार्ड के शौचालय में गंदगी पसरी हुई है। तथा शौचालयों का प्लास्टर व शीट टूटी हुई है और साथ मे शौचालय में लगा फ्लैश भी जर्जर हालत में दिखने को मिला है। कई शौचालयों में लगे दरवाजो को तार से बांधा भी गया इसकी बदहाली को लेकर जिसको फ़ोटो में भी देखा जा सकता है। वही गायनी वार्ड शौचालयों में जल निकासी का भी दुर्दशा देखने लायक है और वहाँ की लगी टोटियां व हाथ धोने वाला वाश बेसिन भी टूटी पड़ी है जिसका सुध कोई लेने वाला भी नही है।
वहीं इमरजेंसी के सामने में भी हल्की बारिश होने पर पानी जमा रहता है जिसकों नाली की सफाई की जहमत उठाने की फुर्सत न तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास है और न ही सफाई का ठेका लेने वाली कम्पनी के पास है।
मेडिकल कॉलेज में सफाई की उड़ी धज्जियां ऐसा लगता है इस दुर्दशा के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन और सफाई के ठेकेदार के बीच कोई गुप्त समझौता हो चुका है, जबकि सूबे के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक लगातार अस्पतालों की बदहाली के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं।और खुद लगातार व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस बाबत मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का कहना है कि इस सम्बंध में हम शासन को पत्र लिखते है और तब इसका सुचारु रूप से कार्य किया जाता है।
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