ब्यूरो रिपोर्ट- एम.असरार सिद्दीकी।
बहराइच- कोरोना वायरस का प्रभाव पड़ोसी देश नेपाल पर भारी पड़ने लगा है नेपाल के अर्थ ब्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र से हुए आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है। दूसरे देशों के नागरिकों के नेपाल प्रवेश पर प्रतिबंध के बाद वहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वीरानी छाई है। सीमा बंद हुए लगभग 7 माह हो चुके है।इसका असर नेपाल सीमा से लगे नेपालगंज क्षेत्र में भी पड़ा है, पर्यटक न आने से होटल व्यवसायी मायूस हैं वह दिवालिया होने के कगार पर है। सीमा से संचालित होने वाले पर्यटन वाहनों के पहिए भी थम गए हैं। पर्यटन उद्योग पर आधारित नेपाल की अर्थ व्यवस्था पर भी कोरोना संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। नवरात्र के समय जहां नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर, पोखरा व लुंबिनी आदि स्थानों पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक रूपईडीहा व अन्य सीमा के रास्ते नेपाल जाते रहे हैं वह इस बार शून्य रहा है। पर्यटकों को रहने के लिए नेपालगंज व नेपाल के कोहलपुर रोड पर कई 3 स्टार व 4 स्टार होटल भी बनाए गए हैं। अक्टूबर माह में नेपालगंज के जिन होटलों में नोरूम के बोर्ड चस्पा होते थे वहां कर्मचारियों को छोड़कर कोई नजर नहीं आ रहा है। महामारी के कारण सीमा बंद होने से नेपाल में पर्यटकों के नहीं पहुंचने से अब नेपाल पर्यटन बोर्ड में बेचैनी है जिसको देखते हुए बोर्ड ने राज्य स्तरीय अध्ययन कार्य बल का गठन किया है जो समीक्षा के साथ पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कार्य करेगी ।नेपाल पर्यटन बोर्ड के कार्यकारी प्रमुख डॉ0 धनन्जय रेग्मी ने बताया कि बोर्ड ने कोविड 19 से प्रभावित पर्यटन क्षेत्र के पुनरुत्थान करने के उद्देश्य से सभी सातो प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिये समिति बनाई गयी है।नट्टा बांके संस्था के अध्यक्ष श्रीराम सिगदेल को आंतरिक पर्यटन पुनरुथान समिति लुम्बिनी प्रदेश का सह सैंयोजक का बनाया गया है।इसी से पता चलता है कि बोर्ड ने पर्यटन क्षेत्र में हुई हानि और उत्थान के लिए नेपालगंज को प्राथमिकता पर रखा है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के कार्यकारी प्रमुख डॉ0 धनन्जय रेग्मी ने नेपालगंज की पर्यटन क्षमता को प्राथमिकता देते हुए कहा कि कोरोना आपदा से हुए नुकसान की समीक्षा व पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ऐसी समितियों का गठन किया गया है।
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