रिपोर्ट कृष्णा गोपाल

बहराइच 08 अक्टूबर। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बहराइच के तत्वावधान मे आपदा विशेषज्ञ के समन्वयन में सस्टेनेबल एनवायरमेंटल एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट सोसाइटी सीड्स नई दिल्ली एवं पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट बहराइच के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एक सुखद भविष्य की ओर विषयक स्वयंसेवकों का 02 दिवसीय क्षमतावृद्धि प्रशिक्षण कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर व जोगापुरवा बौंडी में आयोजित किया गया। जिसमें फखरपुर विकास खंड के घाघरा नदी एवं बेलहा बेहरौली तटबंध के बीच बसे 10432 परिवारों जिनकी आबादी लगभग 71513 है, से चयनित 50 पुरुष एवं 24 महिलाओं कुल 74 स्वयंसेवकों का 02 बैच में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं बाढ़ संबंधी तैयारी के साथ-साथ प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली एवं निकासी प्रक्रिया, खोज एवं बचाव संचालन, बाढ़ प्रभावित परिवारों हेतु प्राथमिक उपचार एवं बाढ़ क्षेत्र में राहत शिविर प्रबंधन संबंधी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित सभी साथियों को प्राथमिक उपचार एवं मूल विषयों के ज्ञानवर्धक जानकारी के साथ-साथ क्रियात्मक अभ्यास द्वारा उन्हें बचाव एवं राहत उपलब्ध कराने संबंधी व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया साथ में यह भी बताया गया कि किस तरह से वह जिस जगह पर रह रहे हैं वहां पर होने वाली किसी भी असामान्य स्थिति में समुदाय का सही मार्गदर्शन कर सकें जिससे जान-माल की क्षति कम करने के साथ-साथ उन्हें एक नई दिशा मिले। यह प्रशिक्षण गुणात्मक रूप से उच्च कोटि का रहा जिसमें सभी स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण सामग्री के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका प्रबंधन हेतु कृषि से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।
उल्लेखनीय है कि फखरपुर विकास खंड के घाघरा नदी और तटबंध के बीच बसे 13 ग्राम पंचायतों के प्रभावित सभी गांव में संचालित आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजना के तहत स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण के साथ-साथ सामुदायिक बैठकों का आयोजन भी होगा। जिसमें स्थानीय स्तर पर आजीविका नियोजन के नए विचारों के अतिरिक्त उनके क्षति आंकलन संबंधी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होगी। अब सक्षम स्वयंसेवकों के साथ-साथ समुदाय स्तर पर आपदा प्रबंधन का एक व्यापक आधार विकसित हुआ है जिसका प्रयोग भविष्य में आने वाली आपदाओं के दुष्प्रभाव को कम करने में लागू होगा।
स्थानीय स्तर पर इस पूरे कार्यक्रम को नियोजित करते हुए करते हुए पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट के निदेशक धु्रव कुमार ने बताया कि निश्चित रूप से यह कार्यक्रम भविष्य के लिए एक व्यापक आधार विकसित करेगा साथ ही भेड़िया प्रभावित क्षेत्र में आजीविका का वैकल्पिक आधार जैसे अमरूद व मक्का आदि की खेती को अपनाने पर भी एक मत तैयार होगा जिससे गन्ने के खेत में भेड़ियों का आवास बनने का आधार कम होगा। प्रशिक्षण में आए हुए सभी स्वयंसेवकों को सहभागिता प्रमाण पत्र देते हुए बताया गया कि सहयोगी संस्थाओं के योगदान से निश्चित रूप से इस क्षेत्र में जान-माल के क्षति में कमी होगी और भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। नदियों के साथ जीने की एक कला विकसित होगी। कार्यक्रम के आयोजन में सीड्स इंडिया की जिला समन्वयक ललिता शुक्ला, प्रेरक श्यामा देवी, आनन्द व मगन का योगदान सराहनीय रहा।
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