रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कांत श्रीवास्तव
विश्व को कर्म प्रदान करने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा क्षेत्र में शनिवार को धूमधाम से हुई। विश्वकर्मा पूजा को लेकर सुबह से ही लोगों में उत्साह देखा गया। फल व मिठाइयों की खरीदारी के लिए दिन भर बाजार में भीड़ लगी रही। विश्वकर्मा पूजा को लेकर लोगों ने अपने-अपने वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा अर्चना की एवं मिठाइयों भी बांटी। इधर लोहा पार्ट्स की दुकान, सजावट , आरा मशीन, आटा चक्की सहित अन्य छोटे-बड़े सभी दुकानों में भी विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई।
राजकीय प्रशिक्षण संस्थान ,सहकारी चीनीमिल पर पुरोहितो द्वारा पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं व कर्मचारियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। विश्वकर्मा पूजा को लेकर विभिन्न स्थानों पर विश्वकर्मा की तस्वीर पर फूल माला व प्रसाद चढ़ाकर धूमधाम से पूजा-अर्चना की गई। वहीं वाहन शोरुम, सर्विस सेंटर, गैरेज के अलावा पावर सब स्टेशन में भी धूमधाम से पूजा की गई।
क्यो होती है विश्वकर्मा पूजा
इस जयंती को लेकर कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि अश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। लेकिन कुछ लोगों का मानना यह भी है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को विश्वकर्मा पूजा करना बेहद शुभ होता है। ऐसे में सूर्य के पारगमन के मुताबिक ही विश्वकर्मा पूजा के मुहूर्त को तय किया जाता है। यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को मनाई जाती है।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा:
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में देवताओं के महल और अस्त्र-शस्त्र विश्वकर्मा भगवान ने ही बनाया था। इन्हें निर्माण का देवता कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की द्वारिका नगरी, शिव जी का त्रिशूल, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, सोने की लंका को भी विश्वकर्मा भगवान ने बनाया था। अत: इसी श्रद्धा भाव से किसी कार्य के निर्माण और सृजन से जुड़े हुए लोग विश्वकर्मा भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।
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