विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डीएलएड प्रशिक्षुओं ने किया वृक्षारोपण।
वातावरण स्वच्छ एवं सुंदर रहे इसके लिए पौधे लगा कर, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प।

रिपोर्ट-अमन कुमार शर्मा
मिहींपुरवा/बहराइच। 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस जो पूरे विश्व में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी, जो प्रकृति को समर्पित दुनिया भर में सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है, इसी से मनुष्य को जीने की मूलभूत सुविधा उपलब्ध होती है। ऐसे में इसके लिए संरक्षण, संवर्धन और विकास की दिशा में ध्यान देना सभी का कर्तव्य है। इसी बात के प्रति सभी को जागरूक करने के उद्देश से 5 जून को हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को डीएलएड प्रशिक्षुओं के द्वारा वृक्षारोपण किया गया। सीबीएल कॉलेज रसूलपुर, खीरी के डीएलएड प्रशिक्षु मोहम्मद जमील कुरैशी ने बताया कि सीबीएल कॉलेज के परिसर में प्रत्येक वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होता रहा है। समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पूरे देश में लाकडाउन होने के कारण सीबीएल कॉलेज बंद है।डीएलएड विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार जयन्त ने आदेश जारी कर जानकारी दी थी, कि सभी प्रशिक्षु अपने-अपने घरों पर वृक्षारोपण करके विश्व पर्यावरण दिवस मनाए।प्रशिक्षु जमील कुरैशी ने कालेज के सभी शिक्षकों, प्रशिक्षुओं एवं मित्रों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मैंने भी आज अपने निज-निवास पर नींबू ,अमरूद तथा नीम का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया है।चलो इस धरती को रहने योग्य बनाएं।
वृक्ष लगाकर पर्यावरण दिवस मनाएं,प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। हवा, पानी, भोजन,धूप सब कुछ हमें प्रकृति से ही मिलता है शायद इसलिए प्रकृति को लोग ईश्वर के रूप में देखते हैं , लेकिन जब आरामऔर सुविधा की बात आती है तो हम सब भूल जाते हैं, कि प्रकृति ने जो हमें दिया है,तो उसका संरक्षण करना भी हमारा कर्तव्य है। आओ इस धरती को हरा-भरा रखने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उसके संरक्षण का संकल्प लेकर एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें।प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं।प्रकृति ने जो हमें नि:शुल्क अनमोल रत्न प्रदान किया है तो उसका संरक्षण करना भी हमारा कर्तव्य है। प्राकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं।
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