रिपोर्ट जगन्नाथ CMD NEWS

रुदौली अयोध्या झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का बलिदान दिवस तहसील के ड्रा भीमराव अम्बेडकर पार्क तेर गांव में मनाया गया।बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक राम चंद्र यादव ने कहा कि रानी लक्ष्मी बाई की प्रमुख सलाहकार झलकारी बाई की बहादुरी और साहस की वजह से बुंदेलखंड की लोकगाथाओं में जगह मिली है।कहा कि रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल होने के कारण, शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं।रानी के वेश में युद्ध करते हुए 4 अप्रैल 1857 को वीर गति को प्राप्त हुईं।1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों को भारतीय नारी के बल, बुद्वि, साहस से परिचित कराने वाली एक साधारण सी महिला झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर सन् 1830 को झांसी के पास ही भोजला गांव में एक निर्धन कोरी परिवार में हुआ था। पिता सदोवर सिंह और मां जमुना देवी थी। बचपन में ही माता का देहांत हो जाने पर पिता सदोवर सिंह ने उनका लालन-पालन एक लड़के की तरह किया। झलकारी बचपन से ही निड़र और बहादुर थी। घुड़सवारी, तलवारबाजी और हथियार चलाने का शौक उन्हें एक कुशल योद्वा में परिवर्तित किया।भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गवाह अनगिनत बहादुर हस्तियां रहीं लेकिन इतिहास की विडम्बना है कि चंद नामों को ही इतिहास अपनी पुस्तक में दर्ज होने का मौका देता है। अनगिनत नाम आज भी गुमनामी में है।लोक गाथाओ में ’’जाकर रण में ललकारी थी,वह तो झांसी की झलकारी थी।
गोरों से लड़ना सिखा गई,
है इतिहास में झलक रही,
वह भारत की ही नारी थी।’’
कार्यक्रम में , अरविंद कुमार शास्त्री, श्यामलाल, रामदेव रावत, रतिपाल कोरी,नंदलाल कोरी एडवोकेट,सियाराम कोरी,लाल जी कोरी,माताफेर, मनोज कुमार यादव,बृजेश कुमार गौतम, राम प्रकाश सिया राम रावत धर्म दास कोरी जग प्रसाद रावत उपस्थित रहे।
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